hindi romantic love story wah use aaj bhi pyaar karti thi

वह उसे आज भी प्यार करती थी, लेकिन दोनों की जिंदगी अलग हो चुकी थी

कुछ रिश्ते कभी खत्म नहीं होते, बस जिंदगी में उनकी जगह बदल जाती है। लोग आगे बढ़ जाते हैं, नई दुनिया बसा लेते हैं, लेकिन दिल के किसी कोने में एक पुरानी मोहब्बत हमेशा जिंदा रहती है। यह कहानी भी ऐसे ही दो लोगों की है, जो एक-दूसरे से आज भी प्यार करते थे, लेकिन अब उनकी राहें अलग हो चुकी थीं।

वह उसे आज भी प्यार करती थी, लेकिन दोनों की जिंदगी अलग हो चुकी थी

बारिश की हल्की बूंदें खिड़की के शीशे पर गिर रही थीं। बाहर सड़क पर भागती गाड़ियों की आवाज और कमरे में बजता धीमा संगीत, सब कुछ हमेशा जैसा था। लेकिन नैना के लिए आज का दिन कुछ अलग था।

उसके हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी। तस्वीर में वह और आरव एक-दूसरे के पास खड़े मुस्कुरा रहे थे। नैना ने तस्वीर को अपनी उंगलियों से छुआ और हल्के से मुस्कुरा दी।

“तुम्हें पता है आरव, आज भी तुम्हारी याद आती है।”

यह बात वह किसी और से नहीं, खुद से कह रही थी। क्योंकि अब आरव उसकी जिंदगी में नहीं था। वह किसी और का पति था और नैना भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी थी। उसके पास एक अच्छा परिवार, एक समझदार पति और एक खूबसूरत घर था। फिर भी कुछ यादें थीं, जो कभी पुरानी नहीं होतीं।

पहली मुलाकात, जो याद बनकर रह गई

first meet in college library

 

नैना और आरव की पहली मुलाकात कॉलेज की लाइब्रेरी में हुई थी। नैना को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। वह अक्सर खाली समय में लाइब्रेरी में बैठकर उपन्यास पढ़ा करती थी।

एक दिन वह अपनी पसंदीदा किताब ढूंढ रही थी, तभी पीछे से एक आवाज आई।

“एक्सक्यूज मी, क्या यह किताब आपको मिल गई?”

नैना ने पलटकर देखा। सामने एक लंबा, मुस्कुराता हुआ लड़का खड़ा था।

“नहीं, मैं भी यही ढूंढ रही हूं,” नैना ने जवाब दिया।

“तो फिर ऐसा करते हैं, अगर मुझे मिली तो आपको दे दूंगा।”

“और अगर मुझे मिल गई तो?”

“तो फिर मुझे पढ़ने के लिए दे दीजिएगा।”

नैना उसकी बात सुनकर हंस पड़ी। उस दिन दोनों के बीच बस इतनी ही बातचीत हुई, लेकिन अगले कुछ दिनों में वे अक्सर लाइब्रेरी में मिलने लगे।

धीरे-धीरे किताबों की बातें दोस्ती में बदल गईं। फिर दोस्ती कब प्यार बन गई, उन्हें खुद भी पता नहीं चला।

जब दोस्ती प्यार में बदल गई

कॉलेज के आखिरी साल में आरव ने नैना को अपने दिल की बात बताई।

उस दिन दोनों कॉलेज के पास बने एक छोटे से कैफे में बैठे थे। बाहर हल्की बारिश हो रही थी और आरव काफी देर से कुछ कहने की कोशिश कर रहा था।

“नैना, एक बात कहूं?”

“हां, बोलो।”

“अगर मैं कहूं कि तुम मेरी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गई हो, तो?”

नैना कुछ पल के लिए चुप हो गई। फिर उसने मुस्कुराते हुए पूछा, “तो मैं क्या कहूं?”

आरव ने हंसकर कहा, “बस इतना कह दो कि मैं भी तुम्हारी जिंदगी का हिस्सा हूं।”

नैना ने नजरें झुका लीं। उसके गाल हल्के से लाल हो गए थे।

“तुम्हें सच में नहीं पता?”

“क्या?”

“कि तुम मेरे लिए कितने खास हो।”

उस दिन के बाद दोनों का रिश्ता बदल गया। अब हर सुबह एक-दूसरे के मैसेज से शुरू होती और हर रात फोन पर लंबी बातचीत के साथ खत्म होती।

वे साथ में भविष्य के सपने देखते थे। एक छोटा सा घर, जहां खिड़की के पास किताबों की अलमारी हो। रविवार की सुबह चाय के साथ लंबी बातें हों और शाम को दोनों बिना किसी वजह के घूमने निकल जाएं।

उन्हें लगता था कि प्यार हो तो दुनिया की हर मुश्किल आसान हो सकती है।

लेकिन जिंदगी हमेशा हमारे सपनों के मुताबिक नहीं चलती।

जब जिंदगी ने दोनों के रास्ते अलग कर दिए

long distance relationship

कॉलेज खत्म होने के बाद आरव को दूसरे शहर में नौकरी मिल गई। वह नैना को भी अपने साथ ले जाना चाहता था, लेकिन नैना के घर की परिस्थितियां कुछ ऐसी थीं कि वह तुरंत कोई फैसला नहीं कर सकती थी।

नैना के पिता की तबीयत ठीक नहीं रहती थी और घर की जिम्मेदारियां भी उसी पर थीं। दूसरी तरफ आरव के परिवार वाले चाहते थे कि वह जल्द से जल्द शादी कर ले।

शुरुआत में दोनों ने हर मुश्किल का सामना साथ करने का फैसला किया। आरव रोज नैना को फोन करता और उसे भरोसा दिलाता कि सब ठीक हो जाएगा।

लेकिन धीरे-धीरे फोन कॉल कम होने लगे। काम का दबाव बढ़ गया और परिवार की उम्मीदें भी।

एक शाम नैना ने आरव से पूछा, “तुम्हें लगता है कि हम सच में साथ रह पाएंगे?”

आरव कुछ देर चुप रहा। फिर बोला, “मैं पूरी कोशिश कर रहा हूं, नैना। बस थोड़ा वक्त चाहिए।”

“और अगर वक्त निकल गया तो?”

“ऐसा मत सोचो। मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता।”

नैना ने उस दिन उसकी बात मान ली। आखिर वह भी तो यही चाहती थी कि उनका प्यार किसी मुकाम तक पहुंचे।

लेकिन कुछ महीनों बाद आरव के घर में उसकी शादी की बात पक्की हो गई। उसके माता-पिता ने एक लड़की पसंद कर ली थी और आरव पर शादी के लिए दबाव डालने लगे थे।

जब आरव ने यह बात नैना को बताई, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

“तुमने उन्हें हमारे बारे में बताया?” उसने कांपती आवाज में पूछा।

“हां, बताया था। लेकिन वे तैयार नहीं हैं।”

“तो तुम क्या चाहते हो?”

आरव के पास कोई जवाब नहीं था।

नैना की आंखों में आंसू भर आए। उसने बहुत धीमी आवाज में कहा, “आरव, मैंने तुमसे कभी बड़े-बड़े वादे नहीं मांगे। बस इतना चाहा था कि जब मुश्किल आए, तो तुम मेरा हाथ मत छोड़ना।”

आरव ने फोन पर ही कहा, “मैं मजबूर हूं, नैना।”

उस रात दोनों के बीच बहुत देर तक खामोशी रही। आखिरकार नैना ने फोन रख दिया। उसे पहली बार महसूस हुआ कि किसी से बहुत प्यार करने के बावजूद उसे खोना पड़ सकता है।

आखिरी मुलाकात

शादी से कुछ दिन पहले आरव ने नैना से मिलने की इच्छा जताई। नैना ने पहले मना कर दिया, लेकिन बाद में वह उससे मिलने के लिए तैयार हो गई।

दोनों उसी पुराने कैफे में मिले, जहां आरव ने पहली बार अपने प्यार का इजहार किया था।

आरव पहले से ज्यादा शांत लग रहा था। नैना ने भी अपनी भावनाओं को छिपाने की पूरी कोशिश की।

“कैसी हो?” आरव ने पूछा।

“ठीक हूं। तुम बताओ?”

“मैं भी ठीक हूं।”

दोनों जानते थे कि वे ठीक नहीं हैं, लेकिन शायद अब सच बोलने की हिम्मत भी नहीं बची थी।

कुछ देर बाद आरव ने कहा, “नैना, मैं चाहता हूं कि तुम मुझे माफ कर दो।”

नैना ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में शिकायत थी, लेकिन उससे कहीं ज्यादा प्यार।

“माफ तो कर दूंगी, आरव। लेकिन यह बताओ कि मैं उन सारे सपनों का क्या करूं, जो हमने साथ देखे थे?”

आरव चुप रहा।

“हमने कहा था कि हम एक छोटा सा घर बनाएंगे। तुमने कहा था कि तुम मेरे लिए हर रविवार को चाय बनाओगे। याद है?”

आरव की आंखें भी नम हो गईं।

“सब याद है, नैना।”

“तो फिर तुम जा कैसे रहे हो?”

इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं था।

उस दिन दोनों ने एक-दूसरे को आखिरी बार गले लगाया। नैना ने आरव की शर्ट को कसकर पकड़ लिया, जैसे उसे छोड़ देने से उसकी पूरी दुनिया बिखर जाएगी।

लेकिन कुछ ही पलों बाद उसे खुद ही पीछे हटना पड़ा।

“खुश रहना, आरव।”

“तुम भी।”

और फिर दोनों अपनी-अपनी दिशाओं में चले गए।

नई जिंदगी, लेकिन पुरानी यादें

कुछ समय बाद आरव की शादी हो गई। नैना को भी उसके परिवार ने शादी के लिए मनाना शुरू कर दिया। वह जानती थी कि आरव अब लौटकर नहीं आएगा। आखिरकार उसने भी अपने परिवार की पसंद से शादी कर ली।

उसका पति, समीर, एक अच्छा इंसान था। वह नैना का ख्याल रखता, उसकी छोटी-छोटी जरूरतों को समझता और उसे खुश रखने की कोशिश करता था।

नैना ने भी पूरी ईमानदारी से इस रिश्ते को निभाया। उसने कभी समीर की तुलना आरव से नहीं की। वह जानती थी कि हर इंसान की अपनी जगह होती है और किसी एक की याद का मतलब यह नहीं कि दूसरे के प्यार की कोई अहमियत नहीं।

समय बीतता गया। नैना की जिंदगी में कई बदलाव आए। घर की जिम्मेदारियां, नौकरी और परिवार के साथ उसका जीवन आगे बढ़ता रहा।

लेकिन जब कभी बारिश होती, तो उसे आरव की याद जरूर आती।

कभी किसी पुराने गाने में, कभी किसी किताब के पन्नों में और कभी उस कैफे के पास से गुजरते हुए, जहां उन्होंने पहली बार साथ चाय पी थी।

वह उन यादों को मिटाना नहीं चाहती थी। लेकिन अब वह उन्हें अपनी जिंदगी पर हावी भी नहीं होने देती थी।

एक दिन फिर आमने-सामने

कई साल बाद एक दिन नैना अपनी दोस्त की शादी में गई। वहां मेहमानों के बीच अचानक उसकी नजर आरव पर पड़ी।

वह कुछ पल के लिए वहीं ठिठक गई।

आरव भी उसे देखकर चौंक गया। उसके चेहरे पर वही पुरानी मुस्कान थी, लेकिन आंखों में अब एक अलग तरह की परिपक्वता दिखाई दे रही थी।

दोनों ने एक-दूसरे को नमस्ते किया।

“कैसी हो, नैना?” आरव ने पूछा।

“अच्छी हूं। तुम कैसे हो?”

“मैं भी अच्छा हूं।”

फिर दोनों ने अपने परिवारों के बारे में बात की। आरव ने बताया कि उसकी एक छोटी बेटी है, जो उसे बहुत प्यारी है। नैना ने भी अपने पति और घर के बारे में बताया।

बातें सामान्य थीं, लेकिन उनके बीच एक अनकही कहानी अब भी मौजूद थी।

कुछ देर बाद आरव ने पूछा, “तुम खुश हो?”

नैना ने हल्की मुस्कान के साथ कहा, “हां, खुश हूं। तुम?”

“हां, मैं भी।”

दोनों कुछ पल चुप रहे।

फिर आरव ने धीरे से कहा, “कभी-कभी सोचता हूं कि अगर उस वक्त हालात अलग होते तो…”

नैना ने उसकी बात बीच में ही रोक दी।

“तो शायद हमारी कहानी अलग होती। लेकिन आरव, जरूरी नहीं कि हर खूबसूरत कहानी का अंत साथ रहने से ही हो।”

आरव ने उसकी तरफ देखा। वह जानता था कि नैना आज भी उन दिनों को याद करती है।

“क्या तुम कभी मुझे भूल पाई?” उसने पूछा।

नैना की आंखों में हल्की नमी आ गई।

“कुछ लोग भुलाए नहीं जाते। बस उनके बिना जीना सीख लिया जाता है।”

आरव के पास कहने के लिए कुछ नहीं था।

शादी में संगीत बज रहा था। लोग हंस रहे थे, नाच रहे थे। लेकिन उस छोटे से कोने में दो लोग अपनी पुरानी यादों को एक आखिरी बार महसूस कर रहे थे।

कुछ देर बाद नैना ने कहा, “मुझे जाना चाहिए। समीर मेरा इंतजार कर रहे होंगे।”

आरव ने सिर हिलाया।

“अपना ख्याल रखना, नैना।”

“तुम भी।”

इस बार दोनों के बीच कोई शिकायत नहीं थी। कोई सवाल नहीं था। बस एक पुरानी मोहब्बत थी, जिसे अब किसी जवाब की जरूरत नहीं थी।

रात को घर लौटते समय नैना कार की खिड़की से बाहर देख रही थी। सड़क पर हल्की बारिश हो रही थी। समीर गाड़ी चला रहे थे और बीच-बीच में उससे दिन के बारे में पूछ रहे थे।

“आज बहुत थक गई हो क्या?” समीर ने पूछा।

“नहीं, बस थोड़ा सोच रही हूं।”

“क्या सोच रही हो?”

नैना कुछ पल चुप रही। फिर मुस्कुराकर बोली, “कुछ पुरानी बातें याद आ गईं।”

समीर ने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया।

“कभी-कभी पुरानी यादें अच्छी होती हैं। बस उन्हें अपने आज की खुशी खराब नहीं करने देनी चाहिए।”

नैना ने उसकी तरफ देखा। उसे महसूस हुआ कि जिंदगी ने उसे एक ऐसा साथी दिया था, जो उसके वर्तमान को समझता था।

घर पहुंचकर वह अपनी अलमारी से पुरानी तस्वीरों का एक डिब्बा निकाल लाई। उसमें कॉलेज के दिनों की कई तस्वीरें थीं। एक तस्वीर में वह और आरव बारिश में भीगते हुए हंस रहे थे।

नैना ने तस्वीर को कुछ देर देखा। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार वह दुखी नहीं थी।

उसने तस्वीर को वापस डिब्बे में रखा और अलमारी बंद कर दी।

वह जानती थी कि आरव उसकी जिंदगी का एक बेहद खूबसूरत हिस्सा था। लेकिन अब उसकी जिंदगी में समीर था, उसके साथ बिताए अनगिनत पल थे और आने वाले कल के कई नए सपने थे।

उस रात सोने से पहले नैना ने खिड़की से बाहर देखा। बारिश अब थम चुकी थी। आसमान में बादलों के बीच से चांद झांक रहा था।

उसने मन ही मन कहा, “तुम जहां भी हो, खुश रहना। शायद हमारी मोहब्बत का यही सबसे खूबसूरत अंत था।”

कुछ प्यार ऐसे होते हैं, जिनका कोई मिलन नहीं होता। वे बस यादों में जिंदा रहते हैं। और शायद प्यार का एक रूप यह भी है कि किसी को दिल से चाहने के बाद भी उसकी खुशी के लिए उसे जाने दिया जाए।

नैना आज भी आरव से प्यार करती थी, लेकिन अब वह जानती थी कि हर प्यार को जिंदगी में जगह देना जरूरी नहीं होता। कुछ प्यार सिर्फ दिल में रहकर ही खूबसूरत रहते हैं।

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