हिंदू धर्म में कई ऐसे त्योहार हैं जिनका संबंध प्रकृति, स्वास्थ्य और पारंपरिक जीवनशैली से होता है। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण पर्व है शीतला अष्टमी। यह पर्व मां शीतला की पूजा को समर्पित होता है और भारत के कई राज्यों जैसे राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और हरियाणा में विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
इस दिन की सबसे खास परंपरा यह है कि मां शीतला को ठंडा भोजन (बासी भोजन) का भोग लगाया जाता है। इसलिए शीतला अष्टमी से एक दिन पहले घरों में कई तरह के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और अगले दिन इन्हें ठंडा ही माता को अर्पित किया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि मां शीतला को ठंडे व्यंजन अर्पित करने से घर में स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि बनी रहती है और बीमारियों से रक्षा होती है।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे:
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शीतला अष्टमी का महत्व
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इस दिन ठंडा भोजन क्यों बनाया जाता है
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मां शीतला को लगने वाले पारंपरिक भोग
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पूरी, पुआ, गुजिया, दही बड़े, मीठे चावल आदि की पूरी रेसिपी
आइए जानते हैं शीतला अष्टमी के पारंपरिक व्यंजन।
शीतला अष्टमी का धार्मिक महत्व
शीतला अष्टमी का पर्व चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन मां शीतला की पूजा की जाती है जिन्हें रोगों की देवी माना जाता है।
मान्यता है कि मां शीतला की पूजा करने से:
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चेचक और अन्य रोगों से रक्षा होती है
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परिवार में स्वास्थ्य बना रहता है
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घर में सुख-शांति आती है
मां शीतला को ठंडा भोजन इसलिए चढ़ाया जाता है क्योंकि यह पर्व शीतलता और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है।
शीतला अष्टमी पर ठंडा भोजन क्यों बनाया जाता है?
शीतला अष्टमी की सबसे खास परंपरा है बासी भोजन (एक दिन पहले बनाया गया भोजन)।
इसके पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण बताए जाते हैं।
धार्मिक कारण
मान्यता है कि शीतला माता को ठंडा भोजन प्रिय है और इस दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता।
वैज्ञानिक कारण
पुराने समय में यह परंपरा गर्मियों की शुरुआत में आती थी। इस दौरान लोग:
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घर की साफ-सफाई करते थे
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भोजन को सुरक्षित रखने की विधियां सीखते थे
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रोगों से बचाव करते थे
इस तरह यह त्योहार स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है।
शीतला अष्टमी पर बनाए जाने वाले पारंपरिक व्यंजन
इस दिन कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए जाते हैं जैसे:
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पूरी
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पुआ / मालपुआ
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गुजिया
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दही बड़े
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मीठे चावल
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कढ़ी
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चने की दाल
अब जानते हैं इन सभी व्यंजनों की पूरी रेसिपी।
1. शीतला अष्टमी की खास पूरी

सामग्री
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2 कप गेहूं का आटा
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1 छोटा चम्मच नमक
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1 छोटा चम्मच अजवाइन
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1 बड़ा चम्मच तेल
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पानी
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तलने के लिए तेल
बनाने की विधि
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सबसे पहले एक बर्तन में आटा लें।
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इसमें नमक, अजवाइन और थोड़ा तेल मिलाएं।
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अब पानी डालकर सख्त आटा गूंथ लें।
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आटे को 15 मिनट के लिए ढककर रख दें।
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इसके बाद छोटी-छोटी लोइयां बनाएं।
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लोइयों को बेलकर पूरी का आकार दें।
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कढ़ाही में तेल गर्म करें।
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अब पूरियों को सुनहरा होने तक तलें।
शीतला अष्टमी पर यह पूरी ठंडी होने के बाद मां शीतला को अर्पित की जाती है।
2. पुआ / मालपुआ की पारंपरिक रेसिपी

पुआ शीतला अष्टमी का सबसे लोकप्रिय भोग माना जाता है।
सामग्री
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1 कप मैदा
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1/2 कप सूजी
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1 कप दूध
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1/2 कप चीनी
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1 छोटा चम्मच सौंफ
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1/2 छोटा चम्मच इलायची पाउडर
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तलने के लिए घी
बनाने की विधि
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एक बर्तन में मैदा और सूजी लें।
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इसमें दूध डालकर घोल तैयार करें।
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अब इसमें चीनी, सौंफ और इलायची पाउडर मिलाएं।
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घोल को 20 मिनट के लिए रख दें।
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कढ़ाही में घी गर्म करें।
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एक चम्मच घोल डालकर पुआ बनाएं।
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दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें।
ठंडा होने के बाद इसे भोग में चढ़ाया जाता है।
3. गुजिया की स्वादिष्ट रेसिपी

गुजिया भी शीतला अष्टमी के भोग में बनाई जाती है।
सामग्री
आटा के लिए
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2 कप मैदा
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4 चम्मच घी
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पानी
भरावन के लिए
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1 कप मावा
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1/2 कप पिसी चीनी
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2 चम्मच सूखे मेवे
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1/2 छोटा चम्मच इलायची पाउडर
बनाने की विधि
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सबसे पहले मैदा में घी डालकर मिक्स करें।
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पानी डालकर सख्त आटा गूंथ लें।
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भरावन के लिए मावा भून लें।
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इसमें चीनी, मेवे और इलायची मिलाएं।
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अब आटे की छोटी लोइयां बनाएं।
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पूरी बेलकर उसमें भरावन भरें।
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गुजिया का आकार दें।
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कढ़ाही में तेल गर्म करके गुजिया तल लें।
4. दही बड़े की रेसिपी

दही बड़े भी शीतला अष्टमी के ठंडे भोग का हिस्सा होते हैं।
सामग्री
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1 कप उड़द दाल
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नमक
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दही
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जीरा पाउडर
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लाल मिर्च पाउडर
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इमली की चटनी
बनाने की विधि
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दाल को 5–6 घंटे भिगो दें।
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दाल पीसकर बैटर बना लें।
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इसमें नमक मिलाएं।
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छोटे-छोटे बड़े बनाकर तल लें।
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बड़े को पानी में भिगोकर निकाल लें।
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दही डालें।
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ऊपर से मसाले और चटनी डालें।
5. मीठे चावल की रेसिपी

मीठे चावल भी मां शीतला के भोग में बनाए जाते हैं।
सामग्री
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1 कप बासमती चावल
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1 कप चीनी
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2 कप पानी
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2 चम्मच घी
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काजू और किशमिश
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इलायची पाउडर
बनाने की विधि
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चावल धोकर 30 मिनट भिगो दें।
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कढ़ाही में घी गर्म करें।
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काजू और किशमिश भून लें।
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अब चावल डालें और हल्का भूनें।
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पानी डालकर पकाएं।
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जब चावल पक जाएं तो चीनी डालें।
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इलायची डालकर अच्छे से मिलाएं।
शीतला अष्टमी पूजा विधि
शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
फिर:
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मां शीतला की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
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ठंडे व्यंजन का भोग लगाएं।
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हल्दी, रोली और फूल चढ़ाएं।
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शीतला माता की कथा सुनें।
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परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
शीतला अष्टमी से जुड़े कुछ नियम
इस दिन कुछ खास नियमों का पालन किया जाता है।
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घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता
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ठंडा भोजन ही खाया जाता है
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घर की साफ-सफाई की जाती है
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मां शीतला की पूजा की जाती है
शीतला अष्टमी के दिन क्या करें और क्या नहीं
क्या करें
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माता की पूजा करें
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ठंडा भोजन का भोग लगाएं
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गरीबों को भोजन दान करें
क्या न करें
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चूल्हा या गैस न जलाएं
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ताजा भोजन न बनाएं
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घर में झगड़ा न करें
निष्कर्ष
शीतला अष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि भारतीय परंपराओं और जीवनशैली का सुंदर उदाहरण भी है। इस दिन मां शीतला की पूजा करके और पारंपरिक ठंडे व्यंजन का भोग लगाकर लोग परिवार के स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पूरी, पुआ, गुजिया, दही बड़े और मीठे चावल जैसे स्वादिष्ट व्यंजन इस त्योहार की खास पहचान हैं। अगर आप भी इस शीतला अष्टमी पर मां शीतला को प्रसन्न करना चाहते हैं तो इन पारंपरिक व्यंजनों को बनाकर भोग अवश्य लगाएं।
यह पर्व हमें सिखाता है कि परंपराएं केवल धार्मिक नहीं होतीं, बल्कि उनमें स्वास्थ्य, विज्ञान और संस्कृति की गहरी समझ भी छिपी होती है।
